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Friday, December 21, 2018

नैनो प्रौद्योगिकी की संकल्पना एवं अनुप्रयोग/Concept & Application of Nano Technology



आज के युग में नैनो तकनीकी हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। हालांकि यह तकनीक प्रारंभिक समय से ही हमारे बीच में विद्यमान रही है लेकिन इस पर अनुसंधान का कार्य पिछले कुछ दशकों में ही शुरू हुआ है।
विज्ञान की उन्नति के साथ साथ ही नैनो तकनीकी ने भी उन्नति प्राप्त की है।
21वीं सदी को नैनो सदी कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी । आज दुनिया भर में बड़े पैमाने पर इस क्षेत्र में शोध हो रहे हैं।
अति सूक्ष्म आकार, बेजोड़ मजबूती और टिकाऊपन के कारण इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिसिन, ऑटो, बायोसाइंस, पेट्रोलियम, फॉरेंसिक और डिफेंस जैसे तमाम क्षेत्रों में नैनो टेक्नोलॉजी की असीम संभावनाएं बन रही हैं।

नैनो टेक्नोलॉजी क्या है?

नैनो एक ग्रीक शब्द है जिसका अर्थ सूक्ष्म अथवा छोटा होता है।
इस शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग 1974 में टोक्यो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर नोरियो तानीगुची द्वारा किया गया था।
पदार्थ के अति सूक्ष्म स्तर को प्रदर्शित करने के लिए नैनो शब्द का प्रयोग किया जाता है।
नैनोटेक्नोलॉजी एक प्रकार की अप्लाइड साइंस है जिसे हम 1 से 100 नैनो (अर्थात 10−9 m या मीटर का अरबवां हिस्सा) स्केल में प्रयुक्त और अध्ययन की जाने वाली सभी तकनीकों और सम्बन्धित विज्ञान का समूह मान सकते है।
इसे अणु एवं परमाणु की इंजीनियरिंग भी कह सकते हैं।
यह तकनीक भौतिक, रसायन विज्ञान, बायोटेक्नोलॉजी तथा इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी को आपस में जोड़ती है।

यह तकनीक किस तरह से मदद करती है?

किसी भी पदार्थ के नैनो स्तर पर काम करके उसे 1000 गुना तक हल्का मजबूत एवं टिकाऊ बनाया जा सकता है।
इसके अलावा इसमें अति सूक्ष्म मशीनों का निर्माण करने का भी प्रयास किया जाता है।
कुल मिलाकर नैनो तकनीकी आकार में कमी और गुणों में वृद्धि करती हैं।

विभिन्न क्षेत्रों में नैनो प्रौद्योगिकी के उपयोग-

चिकित्सा क्षेत्र-
चिकित्सा क्षेत्र में नैनो प्रौद्योगिकी का उपयोग करके सूक्ष्म स्तर के ऑपरेशंस को किया जा सकता है।
किसी विशेष अंग तक दवा वितरण करने वाले तंत्र विकसित किए जा सकते हैं।
उपापचय क्रियाओं की मॉनिटरिंग के लिए तंत्र विकसित किया जा सकता है।
डीएनए मैनिपुलेटिंग का कार्य जो कि नैनो स्तर पर होता है उसके माध्यम से किसी आनुवांशिक बीमारी का निदान भी किया जा सकता है। इसी तरह नैनोफाइबर्स का प्रयोग शल्य चिकित्सा में किया जा सकता है।

कृषि क्षेत्र में-

नैनो उर्वरक, नैनो खरपतवार नाशी आदि का उपयोग कृषि क्षेत्रों में फसलों को बचाने एवं वृद्धि के लिए उपयोग किया जा सकता है।
प्रसंस्करण उद्योग में भी नैनो तकनीकी काफी उपयोगी है।
इसके अतिरिक्त भंडारण, संरक्षण, गुणवत्ता के सुधार तथा फ्लेवर आदि के लिए भी नैनो तकनीक का प्रयोग हो सकता है।

ऑटोमोबाइल क्षेत्र-
नैनो तकनीक का प्रयोग करके इंजन में घर्षण को कम किया जा सकता है।
ग्राफीन का प्रयोग करके हल्के एवं मजबूत वाहन बनाए जा सकते हैं।
यह ईंधन की खपत को कम करने में भी काम लिया जा सकता है।
माइलेज तथा प्रदूषण की समस्याओं का निदान हो सकता है।

कंप्यूटर व मोबाइल के क्षेत्र में-

क्षेत्र में काफी पहले से नैनो प्रौद्योगिकी का प्रयोग हो रहा है।
आज नैनो प्रौद्योगिकी के फलस्वरूप कंप्यूटर और मोबाइल का आकार काफी कम हो चुका है।
नैनो तकनीक के द्वारा ऐसी चिप विकसित की जा रही है जिसमें बहुत कम क्षेत्र में अधिक मेमोरी का प्रयोग हो सकेगा।

औद्योगिक क्षेत्र में-
सौंदर्य प्रसाधन के क्षेत्र में।
नैनोट्यूब्स जिनका प्रयोग भवन निर्माण में किया जा सकता है। यह लचीली व मजबूत होती है।
 पर्यावरण के लिए कम हानिकारक नैनो तकनीक का प्रयोग करके कंपोजिट प्लास्टिक बनाया जा सकता है।
नैनो तकनीक से ज्यादा मजबूत रेशे बनाए जा सकते हैं जो कपड़े व अन्य सामग्री निर्माण में काम आ सकता है।

रक्षा क्षेत्र में-
नैनोसेंसर्स का प्रयोग सिपाहियों के कपड़ों में किया जा सकता है ताकि रक्त स्राव जैसी स्थिति का तुरंत पता चल सके।
नैनो तकनीक पर आधारित स्टील तकनीक का प्रयोग विमानों में किया जा सकता है जो दुश्मन के रडार की पकड़ में न आए।
बमों तथा विस्फोटकों का पता लगाने वाले नैनोसेंसर्स विकसित किए जा रहे हैं।
सूक्ष्म ड्रोन निर्माण में नैनो टेक्नोलॉजी का भरपूर प्रयोग हो रहा है।
नैनो टेक्नोलॉजी के माध्यम से हथियारों को हल्का में मजबूत बनाया जा सकता है।
सिपाहियों के लिए हल्के एवं मजबूत सुरक्षा कवच बनाने में नैनो तकनीक काफी भरोसेमंद है।

इसके अतिरिक्त नैनो तकनीकी का प्रयोग निम्न क्षेत्रों में भी किया जा सकता है-

नैनो फिल्टर्स विभिन्न उद्योगों के वाहनों में काम के लिए जा सकते हैं जिससे पर्यावरण प्रदूषण में कमी आने की संभावना है।
नैनो रोबोट को वायु जल आदि प्रदूषण रोकने के लिए प्रयोग किया जा सकता है।
नैनो बल्ब का उपयोग कम ऊर्जा खपत वाले ऊर्जा साधनों के रूप में किया जा सकता है। इसी तरह बायो नैनो जनरेटर के माध्यम से शरीर से ही बिजली पैदा की जा सकती है।
सौर ऊर्जा उत्पादन में नैनो तकनीक अहम भूमिका निभा रही है।

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RAS Mains Paper 1

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