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Saturday, October 27, 2018

स्व एवं व्यक्तित्व की अवधारणा भाग चौदह /self concept and personality part 14/ RAS MAINS PAPER 3

स्व एवं व्यक्तित्व की अवधारणा भाग चौदह /self concept and personality part 14/ RAS MAINS PAPER 3



व्यवहारपरक विश्लेषण (Behavioral analysis)-

कई परीक्षण तकनीके ऐसी भी है जिनमें केवल व्यक्ति के व्यवहार का विश्लेषण करके ही व्यक्तित्व का पता लगाने की कोशिश की जाती है, ऐसी तकनीकों को व्यवहार परक विश्लेषण कहा जाता है।
उपयोग में लिए जाने वाले कुछ प्रमुख व्यवहारपरक विश्लेषण निम्न प्रकार हैं-
प्रेक्षण
साक्षात्कार
निर्धारण
नाम निर्देशन
स्थितिपरक परीक्षण

प्रेक्षण (observation) -

वैसे तो सामान्यतः हम किसी भी व्यक्ति को देखकर उसकी व्यक्तित्व का अंदाजा लगाने की कोशिश करते हैं लेकिन प्रेक्षण अपने आप में एक अत्यंत परिष्कृत विधि है जिसे केवल प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा ही उपयोग किया जा सकता है।
इसकी सिद्धांतो का बड़ी सावधानी से प्रयोग करना पड़ता है।
उदाहरण के लिए किसी भी मनोवैज्ञानिक द्वारा अपने किसी सहकर्मी द्वारा शेष समाज से की जाने वाली अन्त:क्रिया के आधार पर उसके व्यक्तित्व का अंदाजा लगाया जा सकता है।

साक्षात्कार (interview)-

यह एक सबसे अधिक उपयोग में ली जाने वाली तथा सामान्य विधि है।
इसमें किसी भी व्यक्ति की व्यक्तित्व का मूल्यांकन उससे सामान्य बातचीत करके लगाया जाता है।
व्यक्ति से कुछ विशिष्ट प्रश्न पूछे जाते हैं जिन पर दी गई प्रतिक्रिया से उसकी व्यक्तित्व का पता चलता है।
मूल्यांकन के उद्देश्य के आधार पर साक्षात्कार संरचित अथवा असंरचित हो सकते हैं।
असंरचित तरीके में व्यक्ति से अनेक समय प्रश्न पूछे जाते हैं तथा उसके हाव भाव व उत्तर देने के तरीके से व्यक्तित्व का आकलन किया जाता है  
असंरचित तरीके में कुछ विशिष्ट प्रश्न पूछे जाते हैं अर्थात गहन साक्षात्कार किया जाता है। इसका उपयोग सामान्यतः तब किया जाता है जब हमें साक्षात्कार लिए जाने वाले व्यक्तियों का तुलनात्मक अध्ययन करना हो।

व्यवहारपरक निर्धारण-

इस विधि का प्रयोग शैक्षिक तथा औद्योगिक वातावरण में व्यक्तित्व मूल्यांकन के लिए किया जाता है।
इस विधि में प्रयोज्य को घनिष्ठ रूप से जानने वाले ऐसे व्यक्ति जो उसके साथ कार्य अथवा अन्तर्किया कर चुके हो, उनसे प्रयोज्य के व्यक्तित्व के निर्धारण आकडे लिए जाते है।
आकलनकर्ता उपलब्ध निर्धारण कारकों के आधार पर व्यक्तियों को एक विशेष संवर्ग में रखने का प्रयास करते है।
प्रभावी ढ़ग से निर्धारणों का उपयोग तभी किया जा सकता है जब विशेषक स्पष्ट रूप से परिभाषित हो।

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