स्व एवं व्यक्तित्व की अवधारणा भाग आठ /self concept and personality part 8/ RAS MAINS PAPER 3 - RAS Junction <meta content='ilazzfxt8goq8uc02gir0if1mr6nv6' name='facebook-domain-verification'/>

RAS Junction

We Believe in Excellence

Tuesday, September 25, 2018

स्व एवं व्यक्तित्व की अवधारणा भाग आठ /self concept and personality part 8/ RAS MAINS PAPER 3

फ्रायड की मनोलैंगिक विकास की अवस्थाएं 

( Frued's stages of psycho sexual development)-



व्यक्तित्व विकास के इस सिद्धांत को पंच अवस्था सिद्धांत कहा जाता है। फ्राइड ने बताया है कि बालकों में बचपन से ही एक लैंगिक ऊर्जा उपस्थित होती है जिसे लिबिडो कहा जाता है। बालक हमेशा ही इस लिबिडो की संतुष्टि के लिए प्रयास करता है।
यदि बचपन में लिबिडो की संतुष्टि संतुलित रूप से हो तो यह एक सम्यक व्यक्तित्व को जन्म देती है। वहीं लिबिडो की संतुष्टि कम या ज्यादा होने पर असामान्य व्यवहार का विकास होता है।
व्यक्तित्व विकास की इन 5 अवस्थाओं के अंतर्गत यह लिबिडो किसी एक अंग विशेष में केंद्रित होता है जो निम्न प्रकार है-

मुख अवस्था (oral stage) - 
यह अवस्था बालक के जन्म से 1 वर्ष की उम्र तक पाई जाती है। इस समय लिबिडो का केंद्र मुख में पाया जाता है तथा बालक को चूसने, काटने जैसे कार्यों द्वारा आनंद की अनुभूति होती है।
इस अवस्था में संतुष्टि के कम होने पर मुखवर्ती निष्क्रिय व्यक्तित्व का निर्माण होता है जिनमें आशावादिता, विश्वास व पर निर्भरता का गुण पाया जाता है।
इस अवस्था में संतुष्टि अधिक होने पर मुखवर्ती आक्रामक व्यक्तित्व का विकास होता है जिनमें शोषण, दूसरों पर अत्यधिक प्रभुत्व तथा परपीड़न जैसे गुण पाए जाते हैं।
फ्रायड ने इस अवस्था में कम संतुष्टि को धूम्रपान का कारण माना है।

गुदावस्था(anal stage)- 
एक से दो वर्ष की आयु के बीच यह अवस्था पाई जाती है। इस आयु में कामुकता का क्षेत्र मुख्य से स्थानांतरित होकर गुदा पर स्थापित हो जाता है। इसमें बालक मल मूत्र त्यागने व उन्हें रोकने जैसी क्रियाओं में आनंद प्राप्त करता है। इस समय बालक अपने मन में अंतर्द्वंद्व को महसूस करता है।

लैंगिक अवस्था (Phallic stage) - 
इस अवस्था में बालक स्त्री तथा पुरुष में भेद करना सीख जाते हैं। इस समय लिबिडो का केंद्र जननेंद्रिय पर स्थापित हो जाता है। यह अवस्था 2 वर्ष से 5 वर्ष के बीच होती है। इस समय लड़कों में मातृ मनो ग्रंथि (odious complex) की वजह से माता के प्रति अचेतन लैंगिक आकर्षण उत्पन्न होता है वहीं बालिकाओं में पितृृ मनोग्रंथि (Electra complex) की वजह सेे पिता की और अचेतन लैंगिक आकर्षण उत्पन्न होता है।

अव्यक्त अवस्था ( latency stage)- 
यह अवस्था 6 से 12 वर्ष के दौरान होती है। इस समय बालक विभिन्न सामाजिक गतिविधियों में लिप्त हो जाता हैं। इस समय लिबिडो का केंद्र अदृश्य हो जाता है तथा बालक अपने हम उम्र बच्चों के साथ खेल कर समय व्यतीत करता है। इस समय बालक की कामेच्छा निष्क्रिय हो जाती है।

जननेन्द्रिय अवस्था ( genital stage)- 
मनोलैंगिक विकास की यह अंतिम अवस्था होती है जो 12 वर्ष के पश्चात लगातार चलती रहती है। यदि पूर्व अवस्थाओं में सब कुछ सही रहे तो इस अवस्था में व्यक्ति का विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण पैदा होता है। पूर्व अवस्थाओं में कुछ भी गलत होने पर एक वयस्क के रुप में व्यक्ति जिम्मेदारियां नहीं निभा पाता है।


No comments:

Post a Comment

RAS Mains Paper 1

Pages