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Thursday, September 13, 2018

स्व एवं व्यक्तित्व की अवधारणा भाग पांच /self concept and personality part 5/ RAS MAINS PAPER 3

स्व एवं व्यक्तित्व की अवधारणा भाग पांच /self concept and personality part 5/ RAS MAINS PAPER 3





कैटल का व्यक्तित्व सिद्धांत (cattell's theory of personality)-

कैटल ने सामान्य संरचना के आधार पर व्यक्तियों को एक दूसरे से भिन्न बताया है। इस संरचना का निर्धारण इंद्रियों के अनुभव की रीति के आधार पर किया जाता है।
उन्होंने भाषा में उपलब्ध वर्णनात्मक विशेषको में से कुछ प्राथमिक विशेषको का पता लगाने का प्रयास किया हैं। उन्होंने शीलगुणों को विमाओं के रूप में देखा। उनके अनुसार शीलगुण एक मानसिक संरचना है जो व्यवहार के निरीक्षण से प्रकट होता है। उपरोक्त वर्णित सामान्य संरचना का पता लगाने के लिए उन्होंने कारक विश्लेषण (factor analysis) नामक सांख्यिकी तकनीक का प्रतिपादन किया है।

  • मूल विशेषक(source traits)- उपरोक्त तकनीक के माध्यम से उन्होंने 16 मूल अथवा प्राथमिक कारक विशेषकों का पता लगाया है। ये विशेषक प्रकृति में स्थिर होते हैं तथा व्यक्तित्व निर्माण करने वाले मूल तत्वों के रूप में जाने जाते हैं।

  • सतही अथवा पृष्ठ विशेषक (surface traits)- मूल विशेषकों की अन्तःकिया से जिन विशेषकों की उत्पत्ति होती है, उन्हें सतही विशेषक कहते हैं।

कैटल ने व्यक्तित्व निर्धारण के लिए भी एक प्रणाली विकसित की है  जिसे सोलह व्यक्तित्व कारक प्रणाली (Sixteen personality factory questionnaire, 16 PF) कहा जाता है।


आइजेंक का आयाम सिद्धान्त (eysenck theory of dimensional personality) -

एच जे आइजेंक ने व्यक्तित्व को दो आयामों पर निर्भर बताया है जिन्हें जैविक तथा आनुवांशिक कारकों पर आधारित माना गया है। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में शील गुणों का अस्तित्व मानना अनावश्यक है। मात्र तीन शीलगुण ही व्यक्तित्व की व्याख्या के लिए पर्याप्त है।
ये आयाम स्वयं में कई विशिष्ट विशेषकों को सम्मिलित करते हैं। इन आयामों को निम्न प्रकार समझा जा सकता है -

  • तंत्रिकातापिता बनाम सांवेगिक स्थिरता (neuroticism vs stability)- यह भावनाओं पर नियंत्रण से संबंधित है। इस विमा के एक छोर पर स्थित लोगों में चिड़चिड़ापन, नियंत्रण का भाव, अतिसंवेदनशीलता व बेचैनी पाई जाती है जबकि दूसरे छोर पर स्थित लोग शांत एवं संयुक्त स्वभाव वाले तथा आत्म नियंत्रित होते हैं।

  • बहिर्मुखता बनाम अंतर्मुखता (introversion vs extroversion)- इस विमा के एक छोर पर सामाजिक रोमांच पसंद तथा सक्रिय लोग पाए जाते हैं जबकि दूसरे छोर पर निष्क्रिय शांत सतर्क एवं आत्म केंद्रित लोग स्थित होते हैं।

  • मनस्तापिता बनाम सामाजिकता/यथार्थता (psychoticism vs realism)- यह तीसरा आयाम है जिसे उपरोक्त दोनों आयामों की अंतर्क्रिया से उत्पन्न माना जाता है।

आईजेंक के अनुसार अधिकांश व्यक्ति इन तीनों विमाओं के मध्य क्षेत्र में पड़ते हैं जिन्हें सामान्य व्यक्ति कहा जाता है। जैसे जैसे हम किसी विमा के छोर पर जाते हैं लोगों की संख्या धीरे-धीरे कम होती जाती है।

आईजेंक व्यक्तित्व प्रश्नावली परीक्षण का एक प्रकार है जो कि इन आयामों के परीक्षण के लिए उपयोग में लिया जाता है।

वैसे तो व्यक्तित्व के प्रकार तथा शीलगुण सिद्धांतों को आपस में विरोधी माना जाता है लेकिन आईजेंक ने इनमें समन्वय स्थापित करने की कोशिश की है। इन्होंने व्यवहार संगठन के 4 स्तरों की कल्पना की है। प्रकार सिद्धांत इसमें सबसे ऊपरी स्तर पर हैं जिसके नीचे शीलगुण सिद्धांतों को माना जाता है। इसके पश्चात कुछ अभ्यास अनुक्रियाएं व अंत में छोटी-छोटी विशिष्ट अनुक्रियाएं स्थित है।


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