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Thursday, September 13, 2018

स्व एवं व्यक्तित्व की अवधारणा भाग चार /self concept and personality part 4/ RAS MAINS PAPER 3

स्व एवं व्यक्तित्व की अवधारणा भाग चार /self concept and personality part 4/ RAS MAINS PAPER 3



विशेषक उपागम (trait theory)-

व्यक्तित्व के बारे में जानने के लिए एक अन्य उपागम विशेषक उपागम के नाम से जाना जाता है जिन्हें शीलगुण सिद्धांत भी कहा जाता है। 

इस प्रकार की अप्रोच के अंतर्गत व्यक्तित्व के आधारभूत घटकों के वर्णन अथवा विशेषीकरण को शामिल किया जाता है। 

विभिन्न प्रकार के विशेषक उपागम हमारे जीवन के सामान्य अनुभवों के समान होते हैं।

उदाहरणस्वरूप यदि हमें यह पता है कि कोई व्यक्ति सामाजिक है तो हम उससे जुड़ी कई बातों का पता लगा सकते हैं, जैसे कि उसमें सहयोग व मित्रता जैसे गुण विद्यमान होंगे।

विशेषक सामान्यत स्थाई प्रकृति के होते हैं तथा इस उपागम के अंतर्गत इन्हीं मूल तत्वों की खोज की जाती है।

अलग-अलग व्यक्तियों में विशेषको की शक्ति एवं संयोजन की अलग-अलग मात्रा होती है जिसकी वजह से उनके व्यक्तित्व में विभिन्नता होती है। 

आइए विशेषको से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सिद्धांतों की चर्चा करते हैं-

आलपोर्ट का विशेषक सिद्धांत-

गार्डन आलपोर्ट को विशेषक उपागम का अग्रणी माना जाता है। उनका मानना है कि व्यक्ति में गत्यात्मक प्रवृत्ति वाले कई विशेषज्ञ उपस्थित होते हैं। ये विशेषक व्यक्ति के व्यवहार को नियंत्रित करते हैं जिससे वह विभिन्न परिस्थितियों में एक समान योजनाओं के साथ क्रियाशील होता है।

आलपोर्ट द्वारा विशेषको को तीन भागों में वर्गीकृत किया गया है-

  • प्रमुख विशेषक(cardinal traits)- यह किसी भी व्यक्ति की जीवन की अत्यंत सामान्यीकृत प्रवृत्तियां होती है। जीवनभर व्यक्ति जिस लक्ष्य की प्राप्ति की कोशिश करता है अथवा जिस सिद्धांत का पालन करता है उसे इस विशेषक के अंतर्गत रखा जाता है। कई बार इस विशेष की पहचान ही उस व्यक्ति केेे नाम से होती है। जैसे गांधीवादी एवं हिटलरवादी विशेषक।
 उदाहरण- महात्मा गांधी द्वारा अहिंसा का पालन तथा हिटलर का नाजीवाद प्रमुख विशेषक के कुछ उदाहरण है।

  • केंद्रीय विशेषक( central traits)- ये विशेषक भी प्रवृति में सामान्य हीं होते हैं लेकिन कम प्रभावशील होने की वजह से इन्हें केंद्रीय विषयक कहां जाता है। उदाहरणस्वरुप- बुद्धिमान मेहनती ईमानदार निष्कपट आदि। किसी व्यक्ति की प्रशंसा में लिखें गये पत्रों में इन विशेषको का प्रयोग किया जाता है।

  • गौण विशेषक (secondary traits)- इन विशेषको के दायरे में व्यक्ति की सबसे कम सामान्यीकृत विशेषताओं को रखा जाता है।  व्यक्ति के कहें गए वाक्योंं में इन विशेषको को देखा जा सकता है। 
 उदाहरण- मुझे संगीत पसंद है। 

वैसे तो आलपोर्ट यह मानता है कि व्यक्ति का व्यवहार परिस्थिति पर निर्भर करता है लेकिन फिर भी वह विशेषको को व्यवहार के लिए जिम्मेदार मानता है।
विशेषक किसी भी परिस्थिति एवं व्यक्ति की उसके प्रति प्रतिक्रिया के मध्य होने वाली घटना है। अलग-अलग व्यक्तियों में विशेषक भिन्न होने पर समान परिस्थिति में वे अलग-अलग प्रकार की प्रतिक्रिया करतें है।

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