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Saturday, September 29, 2018

स्व एवं व्यक्तित्व की अवधारणा भाग नौ /self concept and personality part 9/ RAS MAINS PAPER 3

स्व एवं व्यक्तित्व की अवधारणा भाग नौ /self concept and personality part 9/ RAS MAINS PAPER 3


रक्षात्मक युक्तियां (defence mechanism)-

वे कार्य जिन्हें किसी भी व्यक्ति द्वारा अपने वातावरण में समायोजन के लिए अचेतन रूप में किया जाता है, उन्हें रक्षात्मक युक्तियाँ कहते हैं।
 रक्षात्मक युक्तिया सकारात्मक अथवा नकारात्मक दोनों प्रकार की होती है। ये कार्य किसी भी समस्या को वास्तविक स्वरूप को विकृत कर हमारे अहं को तुुरन्त राहत प्रदान करते है। हालांकि ये किसी भी समस्या का समाधान नहीं दे पाते है।
हालांकि इन युक्तियों का अधिक उपयोग वास्तव में समस्या को विकृत कर देता है जिससे व्यक्ति मे अस्वस्थ मानसिकता का विकास होता है।

रक्षात्मक युक्तियों का फार्मूला -  D3R2PC

विस्थापन (displacement)- इस युक्ति में व्यक्ति अपनी अभिव्यक्ति के केन्द्र को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति पर स्थानान्तरित कर देता है।
उदाहरण - आफिस के तनाव का गुस्सा परिवार के सदस्यों पर निकालना।

दिवास्वपन (daydreaming)- किशोरावस्था मे जब व्यक्ति की इच्छाएँ पूरी नहीं हो पाती है तब वह स्वपन लोक में अच्छी बातें सोचकर मन को आराम देता है। 
उदा. = यदि किसी व्यक्ति के आर्थिक तंगी के हालात होते है तो वह यह सोचता रहता है कि उसके पास बहुत सा धन होने पर किस प्रकार खर्च करेगा।

नकारना (denial)- कई बार अत्यन्त कष्टप्रद परिस्थितियों में व्यक्ति उसे पूरी तरह से अस्वीकार कर देता है।
उदा- किसी प्रिय की मृत्यु अथवा असाध्य बिमारी की दशा में इसका प्रयोग किया जाता है।

युक्तिकरण (rationalization)- सामान्य अर्थ में युक्तिकरण से तात्पर्य बहाने बनाना है। व्यक्ति द्वारा अपनी असफलताओं के लिए समाज द्वारा स्वीकार किए जाने योग्य कारण बताए जाते है।
उदा- परीक्षा में कम अंक आने पर बीमारी या घर के वातावरण को दोष देना।

प्रतिगमन (regression) - इससे तात्पर्य व्यक्ति द्वारा कम परिपक्व व्यवहार करते हुए पीछे हट जाने से है। इसमें व्यक्ति द्वारा तनाव पूर्ण स्थिति मे एक बालक की भांति प्रतिगमन का व्यवहार प्रदर्शित किया जाता है। 
उदा- समस्या का सामना करने की बजाय रोने लगना I

प्रक्षेपण (projection)- इस युक्ति में लोग अपनी कमी को मानने से इन्कार कर देते हैं तथा इसका आरोप दुसरो पर लगा देते हैं। इस प्रकार से अपनी कमजोरियों को अचेतन रूप से किसी दूसरे पर आरोपित करने को प्रक्षेपण कहा जाता है।
जैसे कि किसी व्यक्ति को गुस्सा ज्यादा आता है तो वह अन्य व्यक्तियों को आक्रामक बताता है।

क्षतिपूर्ति (compensation) - यदि कोई व्यक्ति किसी एक क्षेत्र में असफल हो जाता है तो वह अन्य क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर अपने आप को साबित करने की कोशिश करता है।
जैसे कि पढ़ाई में असफल व्यक्ति द्वारा खेलकूद के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करके क्षतिपूर्ति की जाती है। इस युक्ति को सकारात्मक प्रतिरक्षा भी कहा जाता है।

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