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Sunday, July 8, 2018

राजस्थान सुजस पत्रिका जून 2018 महत्वपूर्ण बिंदु/ sujas magazine June 2018

राजस्थान सुजस पत्रिका जून  2018 महत्वपूर्ण बिंदु/ sujas magazine June 2018

राजस्थान सुजस पत्रिका का जून माह का अंक पूर्णतया जल प्रबंधन पर आधारित रहा है।

राजस्थान की कुल जनसंख्या देश की आबादी का 5.5 फ़ीसदी है लेकिन यहां पीने योग्य जल की उपलब्धता केवल 1 फ़ीसदी से भी कम है।

देश के 89 फ़ीसदी लवणता, 50 फ़ीसदी फ्लोराइड तथा 58 फ़ीसदी नाइट्रेट लवणता वाले क्षेत्र राजस्थान में है।

वर्तमान में राजस्थान में भूजल का औसत दोहन प्रतिशत 135 है।


सौर ऊर्जा आधारित बोरवेल पंपिंग सिस्टम

बिजली की अनुपलब्धता वाले क्षेत्रों में पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए सौर ऊर्जा आधारित बोरवेल पंपिंग सिस्टम की स्थापना विभिन्न क्षेत्रों में की जा रही है। मई 2018 तक 867 सौर ऊर्जा संचालित पंपिंग सिस्टम लगाए जा चुके हैं।

सौर ऊर्जा आधारित डिफ्लोरिडेशन संयंत्र-

फ्लोराइड की समस्या वाले क्षेत्रों में जल को साफ करने हेतु सौर ऊर्जा आधारित डिफ्लोरेशन संयंत्र लगाया जा रहे हैं। 2018 तक 1520 संयंत्रों के लक्ष्य के विरुद्ध 1379 संयंत्र लगाए जा चुके हैं।

राजस्थान वाटर ग्रिड-

राज्य के 2014-15 के बजट में राजस्थान वाटर ग्रिड की स्थापना की घोषणा की गई थी। इस योजना के अंतर्गत आधिक्य जल वाले स्त्रोतों को कम जल वाले स्त्रोतों से जोड़कर 2051 तक पेयजल की आवश्यकता को पूरा करने का कार्य किया जा रहा है। वर्तमान में इसके अंतर्गत सभी ग्राम पंचायतों की जल उपलब्धता तथा मांग का आकलन करने का कार्य अंतिम चरण में है।

बजट 2018-19 में घोषित 9 नवीन पेयजल परियोजनाएं-

झालाजी का बराना पेयजल परियोजना, बूंदी
गरदडा पेयजल परियोजना, बूंदी
कछावन पेयजल परियोजना, बारां
पवन अकावद पेयजल परियोजना, (बारां कोटा झालावाड़)
डूंगरपुर आसपुर एवं दोवड़ा वृहद पेयजल परियोजना
बीसलपुर जयपुर पेयजल परियोजना द्वितीय चरण
माही बजाज सागर जयसमंद जल स्थानांतरण परियोजना (उदयपुर राजसमंद चित्तौड़गढ़)
जवाई बांध से पेयजल परियोजना (बाली रानी तथा देसूरी पाली जिला)
हरिपुरा मांझी पेयजल परियोजना, कोटा

बांसवाड़ा के मानगढ़ पहाड़ी पर स्थित मानगढ़ धाम में मुख्यमंत्री द्वारा आदिवासियों के गुरु तथा समाज सुधारक गोविंद गुरु की प्रतिमा का अनावरण किया गया। मानगढ़ धाम में 17 नवंबर 1913 मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन अंग्रेजों का विरोध करते हुए 1500 से अधिक भील शहीद हो गए थे।

यहीं पर नौ करोड रुपए की लागत से जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय की स्थापना भी की जा रही है जिसका निर्माण कार्य प्रगति पर है।

मुख्यमंत्री द्वारा 31 मई को राजस्थान फसली ऋण माफी योजना 2018 की शुरुआत बांसवाड़ा के कॉलेज ग्राउंड से की गई जिसके अंतर्गत 29 लाख 30 हजार किसानों के 8000 करोड रुपए के फसली ऋण माफ किए जाएंगे। इसके अंतर्गत ₹50000 तक के ऋण की माफी का प्रावधान रखा गया है।

प्रदेश में न्यूनतम दैनिक मजदूरी के सभी वर्गों में ₹6 की वृद्धि घोषित की गई है। 1 जनवरी 2018 से लागू नई दरें निम्न प्रकार है-
अकुशल श्रमिक -213 रुपए
अर्ध कुशल श्रमिक -223 रुपए
कुशल श्रमिक -233 रुपए
उच्च कुशल श्रमिक -283 रुपए

राज्य में खजूर की खेती-

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के इजरायल दौरे के पश्चात 2007 -08 में राज्य में खजूर की खेती करने की पहल की गई थी।
इस हेतु 2008 में संयुक्त अरब अमीरात से टिश्यू कल्चर वाले खजूर के पौधे आयात किए गए थे।
खजूर की खेती के लिए राज्य के 12 जिलों का चयन किया गया है जिसमें जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, बीकानेर, श्री गंगानगर, हनुमानगढ़, चुरू, झुंझुनू, सिरोही, नागौर, पाली तथा जालौर सम्मिलित हैं।
वर्तमान में राज्य की कुल 1042 हेक्टेयर में खजूर की खेती की जा रही है।
खजूर की खेती को प्रोत्साहन देने के लिए जैसलमेर के सगरा भोजका में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की गई है जो 98 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है।
यहां खजूर के नौ किस्मों के पेड़ लगाए गए हैं।

जयपुर की किसान वैज्ञानिक डॉ राज दहिया को बायोमास कुक स्टोव बनाने के लिए 2017 में बीकानेर के राजूवास में "खेतों के वैज्ञानिक" सम्मान से सम्मानित किया गया है।

राज्य आपदा प्रतिसाद बल (एसडीआरएफ)

राज्य सरकार द्वारा 2012-13 के बजट में केंद्र की तर्ज पर राज्य आपदा प्रतिसाद बल के गठन की घोषणा की थी।
वित्तीय वर्ष 2013-14 में आरएसी की द्वितीय बटालियन में 800 कांस्टेबल की भर्ती कर उन्हें इस क्षेत्र का प्रशिक्षण देना प्रारंभ किया गया।
इस बल के लिए कुल 1120 पद स्वीकृत है जिनमें से 856 वर्तमान में कार्यरत हैं।
2015 में 5 करोड 80 लाख रुपए की लागत  से आवश्यक वाहन तथा उपकरणों की व्यवस्था की गई।
2016-17 से प्रत्येक संभाग में एक एक कंपनी तैनात की गई है।

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने बांसवाड़ा यात्रा के दौरान 10 वीं शताब्दी के बने अरथुना मंदिर में पूजा अर्चना की तथा इसके संरक्षण के लिए प्रयास किए जाने की घोषणा की।

अलवर के राजप्रसादों के पीछे बना सागर नामक जल स्त्रोत अपने आप में अनूठा जल स्थापत्य है। इसके चारों ओर सीढ़ियां छतरियां तथा स्नान के लिए जनाना व मर्दाना घाट बने हुए हैं।

जून माह की सुजस पत्रिका डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें

dipr.rajasthan.gov.in/content/dipr/en/publication/sujas/Sujas2018.html

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