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Sunday, June 3, 2018

राजस्थान आर्थिक सर्वेक्षण 2017-18 भाग 8/कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र/economic review of rajasthan part 8

राजस्थान आर्थिक सर्वेक्षण 2017-18 भाग 8/कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र/economic review of rajasthan part 8

पशुपालन

राजस्थान पशु संपदा में समृद्ध राज्य हैं।

पशुगणना 2012 के अनुसार राज्य में 577.32 लाख पशुधन तथा 80.24 लाख कुक्कुट है। देश के कुल पशुधन का 11.27% राजस्थान में है। राज्य में विभिन्न पशुओं की संख्या निम्न प्रकार से है-

गोवंश - 6.97 प्रतिशत
भैंस    -11.94 प्रतिशत
बकरी - 16.03 प्रतिशत
भेड़    -13.95 प्रतिशत
ऊंट    - 81.50 प्रतिशत


देश के कुल दूध उत्पादन का 12.73 प्रतिशत तथा ऊन उत्पादन का 32.89 प्रतिशत राजस्थान में उत्पादित होता है।

2017-18 में पशुपालन विभाग द्वारा उठाए गए प्रमुख कदम-

भामाशाह पशु बीमा योजना-

योजना के अंतर्गत पशुपालकों को मवेशी बीमा प्रीमियम पर अनुदान दिया जाता है जो निम्न प्रकार है-
अनुसूचित जाति/ जनजाति/ BPL -   70%
सामान्य पशुपालक                     -   50%

अविका कवच बीमा योजना

इस योजना के अंतर्गत भेड़ पालकों को भेड़ों के लिए बीमा पर प्रीमियम पर अनुदान दिया जाता है।
अनुसूचित जाति/ जनजाति/ BPL -   80%
सामान्य पशुपालक                     -   70%

पशुओं को रोगों से बचाने के लिए राज्य सरकार द्वारा 1 वर्ष में दो बार टीकाकरण अभियान चलाया जाता है।

किसान पशुपालकों के लिए प्रशिक्षण सुविधाओं का विस्तार।

मत्स्य विभाग द्वारा आदिवासी मछुआरों के उत्थान हेतु अति महत्वाकांक्षी योजना आजीविका मॉडल, जोकि शुन्य राजस्व मॉडल है, राज्य के तीन जलाशयों जयसमंद (उदयपुर), माही बजाज सागर (बांसवाड़ा) तथा कडाना बांध (डूंगरपुर) में चालू की गई है।

सहकारिता

वर्तमान में सहकारिता की क्षेत्र में 29 केंद्रीय बैंक, 21 जिला दूध संघ, 37 उपभोक्ता थोक भंडार, 36 प्राथमिक भूमि विकास बैंक,6557 कृषि साख सहकारी समितियाँ तथा 34418 सहकारी समितियाँ विद्यमान है।

ज्ञानसागर ऋण योजना

राज्य के ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं को तकनीकी एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने तथा उनके अभिभावकों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए यह योजना प्रारंभ की गई है। इसके अंतर्गत भारत में प्रवेश लेने पर अधिकतम ऋण राशि ₹600000 तथा विदेश में 1000000 रुपए निर्धारित की गई है। विद्यार्थियों को ब्याज दर में 0.50% की छूट का प्रावधान है।

महिला विकास ऋण योजना

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने हेतु भूमि विकास बैंकों द्वारा बिना किसी भूमि प्रतिभूति केवल दो व्यक्तियों की गारंटी के आधार पर ₹50000 तक का ऋण गैर कृषि कार्यों तथा डेयरी व्यवसाय हेतु उपलब्ध कराया जाता है।

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