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Wednesday, June 27, 2018

पारिस्थितिकी भाग 3: समष्टि, समष्टि गुण तथा वृद्धि

पारिस्थितिकी भाग 3: समष्टि, समष्टि गुण तथा वृद्धि

समष्टि क्या है?

किसी भी प्राणी जाति में अकेला जीव (व्यष्टि) कभी भी नहीं पाया जाता है।
अधिकांश जीव किसी भौगोलिक क्षेत्र में एक समूह में रहते हैं, संसाधनों का साझा उपयोग करते हैं अथवा स्पर्धा करते हैं तथा जनन द्वारा अपनी संख्या में वृद्धि करते हैं, इस प्रकार वह मिलकर एक समष्टि की रचना करते हैं।
आद्रभूमि में पाए जाने वाले सभी जलकाक, वनों में सागवान के पेड़, संवर्धन प्लेट पर जीवाणु, त्यागे गए आवास में चूहे तथा तालाब में कमल के पौधे आदि सभी समष्टि के उदाहरण है।
प्राकृतिक वरण द्वारा वांछित गुणों को ग्रहण करने का कार्य समष्टि स्तर पर ही होता है।



व्यष्टि तथा समष्टि में अंतर

व्यष्टि जन्मता अथवा मरता है लेकिन समष्टि की जन्म दरें अथवा मृत्यु दरें होती है। इन दरों को समष्टि के संबंध में संख्या में परिवर्तन की दर के रूप में दर्शाया जाता है।
व्यष्टि या तो नर अथवा मादा होता है लेकिन समष्टि का लिंगानुपात होता है। जैसे कि पशुओं में 60% नर हैं या पक्षियों में 40% मादा है।
किसी निश्चित समय पर समष्टि अलग-अलग आयु वाले जीवों से मिलकर बनी होती है।
किसी समष्टि के आयु वितरण को आलेखित करने पर बनने वाली संरचना आयु पिरामिड कहलाती है।
पिरामिड का आकार समष्टि की स्थिति का वर्णन करता है जैसे कि- वृद्धि, कमी अथवा स्थिरता।

समष्टि वृद्धि

किसी भी समष्टि का आकार स्थिर नहीं होता है तथा समयानुसार बदलता रहता है।
आहार की उपलब्धता, परभक्षण दाब तथा मौसमी परिस्थितियां इसे प्रभावित करती है।
दी गई अवधि के दौरान किसी आवास में समष्टि का आकार चार प्रक्रमों के कारण घटता या बढ़ता रहता है।
इनमें से जन्म दर तथा आप्रावासन वृद्धि एवं मृत्यु दर तथा उत्प्रवासन कमी के लिए उत्तरदायी है।

जन्म दर-जन्म दर से तात्पर्य किसी निश्चित अवधि के दौरान समष्टि में जन्म लेने वाले जीवों की संख्या से है।

मृत्युदर- मृत्यु दर से तात्पर्य किसी निश्चित अवधि के दौरान समष्टि में होने वाली मौतों की संख्या से हैं

आप्रवासन - दी गई समयावधि में समान जाति के जीवों की वह संख्या जो कही ओर से आवास स्थान में आए हो।

उत्प्रवासन - दी गई समयावधि में समान जाति के जीवों की वह संख्या जो आवास स्थान से कही ओर पलायन कर गए हो।

जीवन वृत विभिन्नता -

समष्टि जिस आवास में रहती है उसके अनुरूप अपनी जनन योग्यता का अनुकूलतम विकास करने का प्रयास करती है। जीव सबसे दक्ष जनन युक्ति को अपनाने का प्रयास करते है।
कुछ जीव अपने पूरे जीवनकाल में सिर्फ एक बार (सामन मछली तथा बांस) प्रजनन करते है वही कुछ जीव कई बार ( अधिकांश पक्षी तथा स्तनधारी) प्रजनन करते है।
अधिकांश पक्षी तथा स्तनधारी कम संख्या में संतति पैदा करते है जबकि कम आयु तथा छोटे आकार की मछलियां तथा जीव एक साथ बड़ी संख्या में प्रजनन करते है।
जीवों के जीवन वृत विशेषक उनके आवास तथा अजैविक तथा जैविक घटकों के अनुरूप ही विकसित होते है।

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