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Friday, November 3, 2017

संचार (प्रबंधन) भाग -1 (RAS MAINS PAPER 1)

संचार हमेशा से प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण अंग रहा है। सम्प्रेषण अथवा संचार से तात्पर्य दो पक्षों के मध्य तथ्यों व विचारो के आदान प्रदान व आपसी समझ की प्रक्रिया से है। 
 
थियो हेमेन -'' संचार एक व्यक्ति से दूसरे को सूचना अथवा जानकारी हस्तान्तरित करने की प्रक्रिया है। ''
 

प्रबंधन में संचार का महत्त्व-

 
  • संगठन में संचार नियोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 
  • यह संगठनात्मक आंकड़ों व सूचनाओ की उपलब्धि सुनिश्चित करता है। 
  • संगठन में अधिकारों व दायित्वों के निर्धारण तथा उनके सम्प्रेषण में सहायता करता है। 
  • सम्प्रेषण से निर्णय प्रकिया सरल व तीव्र गति से करने में सहायता मिलती है। 
  • कार्मिको तक संगठन के लक्ष्यों व नीतियों को पहुंचाने में संचार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। 
  • सशक्त संचार माध्यम उपस्थित होने पर कार्मिको में संगठन के प्रति लगाव बढ़ता है 

संचार (सम्प्रेषण ) की विशेषताएं -

 
  • यह दो पक्षों के मध्य संभव होता है। प्रेषक व प्रापक।
  • इसके अंतर्गत सूचनाओ, आदेश निर्देश व आंकड़ों का संचार होता है। 
  • यह उर्ध्वगामी, अधोगामी अथवा क्षैतिज रूप में हो सकता है। 
  • यह विचारो व सूचनाओं के विनिमय की एक प्रकिया है । 
  • संचार प्रबंधकीय कार्यो का आधार व उद्देश्य विशेष की पूर्ति के लिए किया जाता है। 

संचार की प्रक्रिया -

 

संचार की प्रक्रिया में निम्नलिखित चरण होते है -

    • प्रेषक (स्पीकर) -    यह संचार की शुरुआत करता है 
    • सन्देश (मैसेज) -     यह आदेश, निर्देश, तथ्य आदि रूपों में होता है 
    • माध्यम (मीडियम)-  वाहक तत्त्व। लिखित, मौखिक या सांकेतिक। 
    • प्रापक (रिसीवर) -   यह सन्देश को प्राप्त करता है। 
    • प्रतिक्रिया(फीडबैक)-यहा से विपरीत दिशा में संचार प्रारम्भ होता है। 

संचार के प्रकार -

 

दिशा के आधार पर -

  • अधोगामी संचार - उच्च स्तर से निम्न स्तर  की ओर लक्ष्यों, नीतियों व आदेशों का प्रवाह। 
  • उर्ध्वगामी संचार -  अधीनस्थों से उच्चस्थो की ओर  संचार जिसमे कार्य निष्पादन, शिकायत, सुझाव आदि का प्रवाह होता है। 
  • समस्तरीय संचार - एक ही स्तर के समान अधिकारियो के मध्य संचार। 
  • विकर्णीय संचार-   यह संगठन के किन्ही भी दो या अधिक कार्मिको के मध्य हो सकता है। 

 

सम्बन्धो के आधार पर -

  • औपचारिक संचार -   यह एक निर्धारित पद्धति से होने वाला सम्प्रेषण है जो की कार्मिको के औपचारिक सम्बन्धो पर आधारित होता है। 
  • अनौपचारिक संचार - सामाजिक सम्बन्धो पर आधारित यह संचार गतिशील व लचीला होता है। ऐसे संचार का कोई निश्चित स्त्रोत नहीं होता है। इसकी वजह से संगठन में संघर्ष व विवाद  की स्थिति भी पैदा हो जाती है। 

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