सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 - RAS Junction <meta content='ilazzfxt8goq8uc02gir0if1mr6nv6' name='facebook-domain-verification'/>

RAS Junction

We Believe in Excellence

Wednesday, August 2, 2017

सूचना का अधिकार अधिनियम 2005

सूचना का अधिकार अधिनियम 2005, 12 अक्टूबर 2005 से पूरे देश में लागू हो गया है। इसके अनुसार भारत के सभी नागरिकों को सुचना प्राप्त करने का अधिकार दिया गया है।इस अधिनियम में प्रत्येक लोक प्राधिकारी के कार्यो में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व की सुनिश्चितता व जनता की सुचना तक सुलभ पहुच हेतु एक केंद्रिय सूचना आयोग व राज्य सूचना आयोग गठित करने का प्रावधान है।
अर्थ-
सूचना प्राप्त करने की स्वतंत्रता, जिसमे निरिक्षण, टिप्पणियां उद्दरण लेना, कागजात की प्रामाणिक प्रतिया, लोक अधिकारी का रिकॉर्ड लेना, किसी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम में रखी सूचना प्राप्त करना है
उपयोगिता-
यह लोकतंत्र का आधार है।
यह क़ानूनी रूप से मूलभूत मानवाधिकारों की हैसियत रखता है।
यह एक सहभागी, पारदर्शी व जवाबदेह सुशासन के निर्माण में सहायक है।
इससे भ्रष्टाचार में कमी लाने में सहायता मिलती है।
यह सक्षम पंचायती राज की स्थापना में सहायक तत्त्व है।
लोक प्राधिकारी का दायरा-
जिला परिषदों, समितियों, मंडल, जनपद, ग्राम पंचायतों, नगर पालिकाओं, नगर निगमो, ब्लॉक विकास अधिकारियो, उपखंड अधिकारियो, आयुक्त कार्यालयों, सचिवालय स्तर के विभागों, शशस्त्र बलो, सरकार द्वारा संचालित व वित्त पोषित स्कूलों , कॉलेजो, बैंको उद्यमो, अस्पतालों आदि से सुचना मांग सकते है।
आवदेन शुल्क-
आवेदक को अपने आवेदन पत्र के साथ 10 रुपये का शुल्क देना होगा जो नकद या चेक/ड्राफ्ट के रूप में दे सकते है।
समय सीमा-
लोक सूचना अधिकारी को आवेदन करने के 30 दिनों के भीतर सुचना देनी होगी।
आवेदन का तरीका-
आवेदन व्यक्तिगत रूप से , डाक,ईमेल,फैक्स के माध्यम से भेजा जा सकता है। डाक से भेजने पर पंजीकृत डाक से भेजना होगा। व्यक्तिगत जमा कराने पर उसकी पावती लेनी होती है।
प्रथम अपील-
यदि आवेदक असंतुष्ठ हो या सुचना प्राप्त नहीं हो तो वह लोक सूचना अधिकारी के वरिष्ठ अधिकारी को अपील कर सकता है

No comments:

Post a Comment

RAS Mains Paper 1

Pages